अमरकोष से 13

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • पुण्य: धर्म, पुण्य, श्रेयस्, सुकृत और वृष ये सभी पुण्य के नाम के नाम हैं।

  • भाग्य: दैव, दिष्ट, भागदेय, भाग्य, नियति और विधि ये सभी भाग्य के नाम हैं।

  • जन्म: जनुः, जनन, जन्म, जनि, उत्पत्ति और उद्भव ये सभी जन्म के नाम हैं।

  • विषय: रूप, शब्द, गंध, रस और स्पर्श ये पाँच विषय कहलाते है।

  • सफेद या उजला: शुक्ल, शुभ्र, सुचि, श्वेत (श्वेता), विषद, विशद, पाण्डर, औवदात, गौर, बलक्ष, अवलक्ष, धवल और अर्जुन ये सभी सफेद वर्ण के नाम है।

  • पीलेपन के साथ सफेद या कम उजला: हरिण, पाण्डुर और पाण्डु ये सभी पीलेपन लिये हुये सफेद वर्ण के नाम है।

  • पीला: पीत, गौर और हरिद्राभ ये सभी पीले वर्ण के नाम है।




अमरकोष से 12

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • समय: काल, दिष्ट, अनेहा और समय ये सभी समय के नाम के नाम हैं।

  • दिन: घस्र, दिन, अहः, दिवस और वासर ये सभी दिन के नाम हैं।

    प्रत्यूष, अहर्मुख, कल्य (काल्य), उषा, प्रभात, विभात और भात ये प्रातःकाल के नाम हैं।

    दिनान्त सायंकाल का नाम हैं।

    सन्ध्या और पितृप्रसू सन्ध्या के नाम हैं।

    प्राह्न, अपराह्न और मध्याह्न दोपहर के नाम हैं। ठीक दोपहर को मध्याह्न और तीसरे प्रहर को अपराह्न कहा जाता है।

  • रात्रि: तमिस्रा और तामसी अंधेरी रात के नाम हैं। चांदनी युक्त रात को ज्यौत्सिनी कहा जाता है।




अमरकोष से 11

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • सप्तर्षि: मरीचि, अङ्गिरा (अंगिरा), अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वसिष्ठ सप्तर्षियों के नाम के नाम हैं।

  • सूर्य: सूर (शूर), सूर्य, अर्यमा, आदित्य, द्वादशात्मा, दिवाकर, भास्कर, अहस्कर, ब्रघ्न, प्रभाकर, विभाकर, भास्वान्, विवस्वान, सप्ताश्व, हरिदश्व, उष्णरश्मि, विकर्तन, अर्क, मार्तण्ड, मिहिर, अरुण, पूर्वा, द्युमणि (दिनमणि), तरणि, मिस्र, चित्रभानु, विरोचन, विभावसु, ग्रहपति, त्विषांपति, अहर्पति, भानु, हंस, सहस्रांशु, तपन, सविता और रवि ये सभी सूर्य के नाम हैं।

    माठर, पिङ्गल (पिंगल) और दण्ड सूर्य के आसपास रहने वाले गणों के नाम हैं।

    सूर्यसूत, अरुण, अनूरु, काश्यपि और गरुड़ाग्रज सूर्यसारथि के नाम हैं।

    परिवेष (परिवेश), परिधि, उपसूर्यक और मण्डल सूर्य तथा चन्द्रमा के उत्पातादि से उपजे मण्डल के नाम हैं।

  • किरण: किरण, उस्र, मयूख, अंशु, गभरित, घृणि, रश्मि, भानुकर, मरीचि और दीधिति सूर्यकिरणों के नाम हैं।

  • प्रभा: प्रभा, रुक्, रुचि, छवि, द्युति, दीप्ति, रोचिः और शोचिः प्रभा के नाम हैं।

    प्रकाश, द्योत और आतप घाम के नाम हैं।

  • मृगतृष्णा: मृगतृष्णा और मरीचिका मगृतृष्णा के नाम हैं।




अमरकोष से 10

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • वृहस्पति: वृहस्पति, सुराचार्य, गीर्पति, गीःपति, गीष्पति, धिषण, गुरु, जीव, आंगिरस, वाचस्पति और चित्रशिखण्डिज ये सभी वृहस्पति के नाम के नाम हैं।

  • शुक्र: शुक्र, दैत्यगुरु, काव्य, उषना, भार्गव और कवि ये सभी शुक्र के नाम हैं।

  • मंगल: अंगारक, कुज, भौम, लोहितांग और महीसुत ये सभी मंगल के नाम हैं।

  • बुध: रोहिणेय, बुध और सौम्य ये सभी बुध के नाम हैं।

  • शनि: सौरि (सौर) और शनैच्चर (शनि) शनि के नाम हैं।

  • राहु: तम, राहु, स्वर्भानु, सैहिकेय और विधुन्तुद ये सभी राहु के नाम हैं।

  • केतु: केतु और शिखी केतु के नाम हैं।




अमरकोष से 9

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • चन्द्रमा: हिमांशु, चन्द्रमा, चन्द्र, चन्द, इन्दु, कुमुदबान्धव, कुमुदबन्धु, विधु, सुधांशु, शुभ्रांशु, ओषधीश, निशापति, अब्ज, जैवातृक, सोम, ग्लौ, मृगांक, कलानिधि, द्विजराज, शशधर, शशांक, शशी (शशि), नक्षत्रेश और क्षपाकर ये सभी चन्द्रमा के नाम के नाम हैं।

    चन्द्रमा का षोडकांश (सोलहवाँ भाग) कला कहलाती है। बिम्ब और मण्डल क्रमशः सूर्य और चन्द्रमा के मण्डल के नाम हैं।

    चन्द्रिका, कौमुदी और ज्यत्सना ये सभी चांदनी के नाम हैं। प्रसाद और प्रसन्नता स्वच्छता या निर्मलता के नाम हैं। कलंक, अंक, लाञ्छन (लांछन), चिह्न, लक्ष्म, लक्ष्मण ये सभी चन्द्रमा के अन्तरीय निशान के नाम हैं।

    सुषमा महाशोभा का नाम है। शोभा, कान्ति, द्युति और छवि ये सभी शोभा के नाम हैं।

  • पाला: अवश्याय, नीहार, तुषार, तुहिन, हिम, प्रालेय और महिका ये सभी पाला के नाम हैं।

    हिमानी और हिमसंहति हिमसमूह के नाम हैं।

  • ध्रुव: ध्रुव और औत्तानपाद ध्रुव के नाम हैं।

    अगस्त्य, कुम्भसंभव और मैत्रावरुणि अगस्त्य के नाम हैं। लोपामुद्रा अगस्त्य की पत्नी का नाम है।




अमरकोष से 8

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • आकाश: द्यो, दिव्, अभ्र, व्योम, पुष्कर, अम्बर, नभ, अन्तरिक्ष, गगन, अनन्त, सुरवर्त्म, वियत्, विष्णुपद, आकाश और विहायस ये सभी आकाश के नाम के नाम हैं।

  • बादल: अंभ्र, मेघ, वारिवाह, स्तनयुत्नु, बलाहक, धाराधर, जलधर, तडित्वान, वारिद, अम्बुभृत, घन, जीमूत, मुदिर, जलमुक् और धूमयोनि ये सभी बादल के नाम हैं।

    कादम्बिनी और मेधमाला मेधपंक्ति के नाम हैं। मेघ से उत्पन्न पदार्थ को अभ्रिय कहते हैं। स्तनित, गर्जित, मेघनिर्घोष और रसित आदि ध्वनियाँ मेघगर्जना के नाम हैं।

  • बिजली: शंपा (शम्बा), शतह्रदा, ह्रादिनी, ऐरावती, क्षणप्रभा, तडित्, सौदामिनी, विद्युत, चंचला और चपला ये सभी बिजली के नाम हैं।

    मेघज्योति और इरंमद मेघ की ज्योति के नाम हैं। इन्द्रायुध और शुक्रधनु इन्द्रधनुष के नाम हैं।

  • वर्षा: वृष्टि और वर्ष वर्षा के नाम हैं। अवग्राह और अवग्रह वर्षा न होने के नाम हैं। शीकर (सीकर) जलकण या फुहारे का नाम है।

    वर्षोपल और करका ओला के नाम हैं। मेघों से अंधेरा किये दिन को 'दुर्दिन' कहा जाता है। अन्तर्धा, व्यवचा, अन्तर्धि, अपवारण, आपिधान, तिरोधान, पिधान और आच्छादन अन्तर्धान (छिप जाने) के नाम हैं।




अमरकोष से 7

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • शीघ्र: शीघ्र, त्वरित, लघु, क्षिप्र, अर, द्रुत, सत्वर, चपल, तूर्ण, अविलम्बित और आशु ये 11 शीघ्र के नाम के नाम हैं।

  • नित्य या लगातार: सतत्, अनारत, अश्रान्त, संतत, विरत, अनिश, नित्य, अनवरत और अजस्र ये 9 नित्य के नाम हैं।

  • कुबेर: कुबेर, त्र्यम्बकसख, यक्षराट्, गुह्यकेश्वर, मनुष्यधर्मा, धनद, राजराज, धनाधिप, किन्नरेश, वैश्रवण, पौलस्त्य, नरवाहन, यक्ष "यक्षेश्वर" ये सभी कुबेर के नाम हैं।

    कुबेर की वाटिका का नाम चैत्ररथ है, कुबेर के पुत्र का नाम नलकूबर है, कुबेर के स्थान का नाम 'कैलास' है, कुबेर की पुरि का नाम 'अलका' है और कुबेर के विमान का नाम पुष्पक है,

  • किन्नर: किन्नर, किंपुरुष, तुरंगवदन और मयु ये सभी किन्नर के नाम हैं।

  • निधियाँ: पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुन्, कुन्द, नील और खर्ब ये सभी निधियों के नाम हैं।




अमरकोष से 6

अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

  • यमराज: धर्मराज, पितृपति, समवर्ती, परेतराट्, कृतान्त, यमुनाभ्राता, शमन, यमराट्, यम, काल, दण्डधर, श्राद्धदेव, वैवस्वत और अन्तक ये 14 यमराज के नाम हैं।

  • राक्षस: राक्षस, कौणप, क्रव्यात, कात्र्याद, अस्रप (अश्रप), आशर (आशिर), रात्रिचर, कर्बुर, निकषात्मज, यातुधान (जातुधारन), पुण्यजन, नैर्ऋत, यातु और रक्षः ये 15 राक्षसों के नाम हैं।

  • वरुण: प्रचेताः, वरुण, पाशी, वादसांपति और अप्पति ये 5 वरुण के नाम हैं।

  • पवन: श्वसन, स्पर्शन, वायु, मातरिश्वा, सदागति, पृषदश्व, गन्धवह, गन्धवाह, अनिल, आशुग, समीर, मारुत, मरुत्, जगत्प्राण, समीरण, नभस्वान, बात, पवन, पवमान और प्रभञ्जन ये 20 वायु के नाम हैं।

    प्राण, अपान, समान, उदान और वायन ये प्राणादि पंचवायु शरीरस्थ कहलाते हैं। हृदय में प्राण, गुदा में अपान, नाभि में समान, कण्ठदेश में उदान और सारे देह में व्यान टिका रहता है।




  • अमरकोष से 5

    अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

    • कल्पवृक्ष: मन्दार, पारिजातक, सन्तान, कल्पवृक्ष और हरिचन्दन ये 5 कल्पवृक्ष या देववृक्ष के नाम हैं।

    • अश्विनीकुमार: स्ववैद्य, अश्विनीसुत, नासत्य, अश्विन, दस्त्र और आश्विनेय ये 6 अश्विनीकुमारों के नाम हैं।

      सनत्कुमार और वैधात्र ये 2 ब्रह्मापुत्रों (सनत्कुमारों) के नाम हैं।

    • अग्निदेव: अग्नि, वैश्वानर, वह्नि, वीतिहोत्र, धनञ्जय, कूपीटयोनि, ज्वलन, जातवेदाः, तनूनपात्, बर्हिःशुष्मा, कृष्णवर्त्मा, शोचिष्केश, उषर्बुध, आश्रायाश, वृहद्भानु, कृशानु, पावक, अनल, लोहिताश्व, वायुसख (वायुसखा), शिखावान्, आशुशुक्षणि, हिरण्यरेताः, हुतभुग्, दहन, हव्यवाहन, सप्तार्चिः, दमुनाः, शुक्र, चित्रभानु, विभावसु, शुचि और आप्पित्त ये 34 अग्निदेव के नाम हैं।

      और्व, वाडव और वडवानल ये 3 वडवानल के नाम हैं।

      ज्वाल, कील, अर्चि, हेति और शिखा ये 5 अग्नि की ज्वाला के नाम हैं।




    अमरकोष से 4

    अमरसिंह रचित 'अमरकोष' (Amarkosh) संस्कृत की अमर रचना है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुत सुन्दर व्याख्या की गई है। इस ग्रंथ के सार को अन्तर्जाल में लाने के लिये ग्रंथ से उद्धरणों का सिलसिला जारी किया जा रहा है।

    • इन्द्र: इन्द्र, मरुत्वान्, मधवा (मधवान्), विडौजा, पाकशासन, वृद्धश्रवा,सुनासीर (शुनासीर), पुरूहूत, पुरन्दर, जिष्णु, लेखर्षभ, शक्र, शतमन्यु, दिवस्पति, सुत्रामा, गोत्रभित्, वज्री, वासव, वृत्रहा, वृषा, वास्तोष्पति, सुरपति, बलाराति, शचीपति, जम्भभेदी, हरिहृय, स्वाराण्, नमुचिसूदन, संक्रन्दन, दुश्च्यवन, तुषाराण्, मेघवाहन, आखण्डल, सहस्त्राक्ष और ऋमुक्षा ये 35 इन्द्र के नाम हैं।

      इन्द्र की पत्नी के 3 नाम हैं - पौल्लोमी, शची (सची) ) और इन्द्राणी। इन्द्र की नगरी (इन्द्रपुरी) का नाम है - अमरावती। इन्द्र के सारथी का नाम मातलि और घोड़े का कान उच्छैश्रवा है। इन्द्र की वाटिका नन्दन कहलाता है। इन्द्र के घर का नाम वैजयन्त है। इन्द्र के दो पुत्र हैं - जयन्त और पाकशासनि। ऐरावत, आभ्रामातङ्ग (आभ्रामातंग), ऐरावण और आभ्रमुवल्लभ ये 4 चार इन्द्र के हाथी के नाम हैं।

    • वज्र: ह्रादिनी, वज्र, कुलिश, भिदुर, पवि, शतकोटि, स्वरुः, शम्ब, दम्भोलि और अशनि ये 10 वज्र के नाम हैं।

      व्योमवान और विमान ये 2 विमान के नाम हैं। नारद, पर्वत, तुम्बुरु, देबल आदि देवर्षि कहलाते हैं। सुधर्मा और देवसभा देवताओं के सभा के नाम हैं। पीयूष, अमृत और सुधा ये 3 अमृत के नाम हैं।

      मन्दाकिनी, वियद्गङ्गा (वियद्गंगा), स्वर्णदी और सुरदीर्धिका ये 4 देवगंगा (आकाशगंगा) के नाम हैं।

      मेरु, सुमेरु, हेमाद्रि, रत्नसानु और सुरालय ये 5 सुमेरु पर्वत के नाम हैं।




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